Vaidya Somraj Kharche, M.D. Ph.D. (Ayu) 08 Aug 2019 Views : 1178
Vaidya Somraj Kharche, M.D. Ph.D. (Ayu)
08 Aug 2019 Views : 1178

क्या विटामिन B12 की प्राप्ती के लिए मांस खाना जरूरी है?

सम्पूर्ण संसार मे जितने भी साधुसंत होकर गए या जो भी आज प्रत्यक्ष जीवित है, सभी शाकाहार का समर्थन करते है। हिन्दू धर्म के सिवा अन्य धर्मियों में भी जिन साधुपुरुषों को ईश्वरी साक्षात्कार हुआ है, उन सभी ने भी शाकाहार का समर्थन किया है। शाकाहार करने से शरीर मे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और यह सकारात्मक ऊर्जा यम, नियमादि अष्टांग योगसाधना करने के लिए बड़ी ही मददगार सिद्ध होती है। मतलब प्रकृति भी चाहती है कि आप शाकाहार करे। शाकाहार यह पूर्णाहार है। मतलब शाकाहार करनेवाले व्यक्ति को अन्य किसी स्रोत से अन्न लेने की आवश्यकता नही पड़ती। परंतु आजकल शाकाहारी लोगो के इस विश्वास को ठेस पहुंच रही है और ऐसा सिद्ध किया जा रहा है कि शाकाहार के साथ साथ मांसाहार भी जरूरी है। क्योंकि विटामिन बी 12 यह सिर्फ मांसाहारी स्रोतों से ही मिलता है। इसलिये अल्प ही क्यो न हो विटामिन बी 12 की पूर्तता के लिए आपको मांस खाना चाहिए। अब खानेवाले को तो खाने का बहाना चाहिए। शाकाहार करनेवाले जिन व्यक्तियों के मन पर धर्मसंस्कारो की पकड़ ढीली है, वो तुरंत सम्मिश्र आहार (शाकाहार मांसाहार) सेवन शुरू कर देते है। अतःएव इनकी समस्या का तो समाधान हो गया। विटामिन बी 12 की इनके शरीर मे जो कमी है, उसकी आपूर्ति इस मांस सेवनसे हो जाती है। पर उनका क्या, जो पूर्णतः शाकाहारी है? उन्हें कैसे मिलेगा विटामिन बी 12? क्योंकि ये तो सिर्फ सामिष स्रोतों से ही मिलता है ऐसे बताया जाता है। परंतु यह पूर्णतः सत्य नही है। विटामिन बी 12 के शाकाहारी स्रोत भी है जैसे देसी गाय का दूध और कुदरती रूप से उगाई हुई तुवर दाल। परंतु बाजार से ये दोनों चीजे गायब है। भारत मे जब से श्वेतक्रान्ति हुई तब से देसी गाय का दूध गायब है और जब से हरित क्रांति हुई तब से देसी धान्य गायब है।

कुछ एक प्रमाण में देसी गाये आज भी उपलब्ध है। पर जितनी है, वो भी कचरे के डब्बो की खाक छानने के लिए मजबूर है। दूध कम देती है, इसलिये मालिक भी उसे बिना चारा डाले ऐसे ही चरने के लिए छोड़ देता है। अब आप ही विचार कीजिये कि ऐसी गायों के दूध में भी कहाँ से आवश्यक मात्रा में विटामिन बी 12 होगा? हमे सिर्फ दूध से मतलब होता है। जिस गाय का वो दूध होता है, उसका आहार उसके दूध के संगठन का आधार होता है। इसलिये पर्याप्त और उचित खाना नही मिलने की स्थिती में भी अगर हम गाय के दूध विटामिन बी12 जैसे विटामिन की अपेक्षा करेंगे तो हमसे अधिक मूर्ख कौन हो सकता है?

दालों के विषय मे कहां जाए तो सब अंधेरा ही अंधेरा है। क्योंकि वर्तमान काल मे 1% से भी कम किसान ऑर्गेनिक पद्धति से दाल की खेती करते है। हालांकि यह प्रमाण धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है फिर भी 140 करोड़ की तुलना में नगण्य है। आर्गेनिक पद्वति से उगाई एवं पोषित तुवर दाल में अल्प मात्रा में विटामिन बी12 रहता है। यह अल्प भले ही हो, पर एक मनुष्य मात्र के लिए पर्याप्त है। मतलब प्रकृति ने शाकाहारी स्रोतों से विटामिन बी12 देने की पर्याप्त व्यवस्था तो की है। पर ज्यादा उत्पन्न लेने के लोभ में मनुष्य ने वो भी खो दिया है। हाइब्रिड अनाज ने तो सभी पोषणमूल्यो का पूर्णतः ह्रास कर दिया है। कोई थोड़ा इंटरनेट पर संशोधन करेगा तो उसे पता चलेगा की तुवर दाल में विटामिन बी12 कभी भी नही होता। क्योंकि अभी तक जितना संशोधन हुआ है उसमे आर्गेनिक पद्धति से उगायी तुवर दाल पर नही किया गया। इसलिये यह बात प्रकाश में नही आई। तुवर दाल के खेती में जब देसी गाय के गोबर एवम गोमूत्र का उपयोग वारंवार किया जाता है, तब ही तीसरी - चौथी फसल के बाद उसमे विटामिन बी12 अत्यल्प प्रमाण में पाया जाता है। परंतु इस पद्धति का उपयोग चूँकि आज कोई करता नही, इसलिये वर्तमान काल की तुवर दाल में विटामिन बी12 अत्यल्प प्रमाण में भी नही पाया जाता।

कहने का तात्पर्य यह है कि विटामिन बी12 की प्राप्ती के लिए एक प्राणीमात्र को मारकर खाना यह प्रकृतिसंगत नही है। शाकाहारी आहार में भी उसके स्रोत है, जिनको हमे विकसित कर उसका लाभ लेना चाहिए। परंतु जब तक स्रोत पूर्णतः विकसित नही होते तब तक बाजार में जो चूसनेवाली गोलियां मिलती है, उनका उपयोग कर जरूरत को पूर्ण किया जा सकता है। अस्तु। शुभम भवतु।

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