Vaidya Somraj Kharche, M.D. Ph.D. (Ayu) 25 Jul 2019 Views : 1177
Vaidya Somraj Kharche, M.D. Ph.D. (Ayu)
25 Jul 2019 Views : 1177

क्या सच मे वजन कम होता है?

अहितकर आहारविहार जैसे रोज बाहर का तला हुआ खाना, फ़ास्ट फ़ूड खाना इसकी वजह से धीरे धीरे लोगो मे मेदस्विता बढ़ती गयी और आज यह समस्या बहोत ही विकराल रूप धारण करके समाज के सामने चुनौती के रूप में खड़ी है। आयुर्वेद की भाषा मे इसे स्थौल्य और साधारण बोलचाल की भाषा मे इसे मोटापा कहते है। प्राचीन काल मे भी इस व्याधि का अस्तित्व था पर आज के जितना भयावह नही। भूतकाल में यह धारणा थी कि मोटापा सिर्फ बड़ो में अर्थात अधेड़ उम्र वाले लोगो मे आता है। परंतु जीवनशैली बदलाव के कारण आज मोटापा 2 - 3 साल के बच्चों में भी देखने को मिलता है। कई बार मोटापा वंशानुगत भी होता है, पर वह एक अलग स्थिती है। आजकल जो हमे देखने को मिलता है, वह वंशानुगत न होकर, अहितकर आहारविहार करने की वजह से होनेवाला एक व्याधि है। जैसे ही वजन बढ़ना शुरू होता है, लोग उसकी चिकित्सा करवाने के लिए प्रवृत्त होते है। उसमे सबसे पहला कदम तो समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मोटापा कम करने के उपचार ढूंढकर उन्हें शुरू करना होता है। जिसमे सुबह खाली पेट लौकी का जूस पीना, गरम पानी मे नींबू निचोड़कर और मधु डालकर पीना, थोड़ा अद्रक बीट पालक गाजर या जो भी घर मे हरी सब्जी होगी उसका जूस बनाकर पीना ऐसे उपचार शुरू होते है। पर इससे भी कोई फर्क नही पड़ता। उल्टा कुछ समस्याएं जरूर उत्पन्न हो जाती है, जैसे पूरे शरीर मे खुजली उत्पन्न होना, पाचनशक्ति दुर्बल होना वगैरे वगैरे। इसके बाद वाला कदम होता है यूट्यूब पर विविध प्रकार के वीडियो देखकर उसका अनुसरण करना। इसमे भी एक दो महीने निकल जाते है। फिर भी कुछ फर्क नही पड़ता। इसके पश्चात प्राणायाम, अनुलोम-विलोम या कपालभाति या ऐसे ही कुछ अन्य योग क्रियाओं का समावेश किसी बाबाजी के यूट्यूब वीडियो देखकर किये जाते है। अब चूँकि ये सब करने के लिए सुबह जल्दी उठना पड़ता है। इसलिये इस संकल्प के भी जल्दी ही बारा बज जाते है और वजन जैसे थे रहता है। उसमे रत्तीभर भी फर्क नही पड़ता।

इन सब स्व-उपचारों के बाद लोगो को आयुर्वेदिक डॉक्टरों की याद आती है और फिर एक ऐसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की खोज शुरू होती है जो वजन कम कर दे। इस मामले में होता यूँ है कि एक मांगो तो हजार मिलते है। आपको चाहिए होता है एक ही डॉक्टर और इंटरनेट पर सर्च करने के बाद मिलते है कई सारे डॉक्टर और प्रत्येक डॉक्टर ज्यादा से ज्यादा वजन कम करके देने का दावा करता है। इस गड़बड़ी से उबरने में 2-4 दिन लग जाते और फिर कुछ मित्रमंडली के अनुभव सुनकर एक आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेना तय हो जाता है। डॉक्टर से सलाह लेकर चिकित्सा भी शुरू की जाती है। पंचकर्म भी किया जाता है और बहोत नही पर कुछ तो वजन कम हो जाता है। ऐसा करते करते कमसे कम 2 महीने तो निकल जाते है। दो महीने की डाइटिंग और व्यायाम के बाद रुग्ण वही वही उपक्रम अनुसरित करते करते बोर हो जाता है। अब उसे भोजन के उन विविध व्यंजनो की फिर से याद आना शुरू हो जाती है, जिसे वो चिकित्सा के पहले खाया करता था और जो उसके वजन बढ़ने का कारण थे। अब जैसे ही रुग्ण उन व्यंजनों को फिर से खाना शुरू कर देता है, उसका वजन पहले जितना ही हो जाता है। मतलब आप वजन एक विवक्षित समय के लिए ही कम कर सकते हो। स्थायी रूप से नही। इसलिये आयुर्वेद के आद्य ऋषि, आचार्य चरक ने 2000 वर्ष पूर्व ही स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया है कि - न ही स्थूलस्य भेषजम। अर्थात मोटे व्यक्ति के लिए मोटापा कम करने की कोई औषधि ही नही है। आप चाहे कितनी भी उठापटक कर लो, वजन कम नही होता।

मनुष्य शरीर मे जो कोशिकाएं (Cells) होती है। उनमें डीएनए होते है। मनुष्य का शरीर कहां टेढ़ा है, कहा सीधा है। कहा काला है और कहां गोरा है। कोई शिशु जब जन्म लेता है तो उसकी अधिकतम ऊंचाई कितनी होगी ये भी उसके डीएनए में एनकोडेड रहता है। इसलिये उस बच्चे की ऊंचाई एक विशिष्ट परिमाण से आगे नही बढ़ती। शरीर के मोटे और पतले होने का रहस्य भी यही छुपा हुआ है। जन्मतः ही हमारे शरीर का प्रारूप डीएनए में एनकोडेड रहता है। जैसे जैसे समय बीतता जाता है और शरीर की वृद्धि होती है वैसे वैसे डीएनए में एनकोडेड सूचनाओं के आधार पर शरीर का आकार बनता जाता है। इसलिये अगर किसी व्यक्ति के डीएनए में शरीर का वजन 100 किलो होना ही लिखा है, तो फिर आप चाहे जो चिकित्सा करो, वजन 100 से नीचे ही नही जाएगा। अगर डाइटिंग या चिकित्सा करवाके आपने 100 किलो का 80 करवा लिया तो भी वह एक विवक्षित समय के लिए ही होगा और रहेगा। बाद में जैसे ही आप डाइटिंग छोड़कर भरपेट आहार लेना शुरू करते हो, डीएनए उस कम हुए वजन को बढ़ाकर पहले जितना ही कर देता है। क्योंकि शरीर की घटना (Constitution) में उस शरीर का वजन 100 किलो ही एनकोडेड होता है। इसलिये वजन कम करने के प्रयत्नों को कभी सफलता नही मिलती यह भूतकाल भी था। यही वर्तमान सत्य है और यही भविष्य भी रहेगा।

इंच लॉस - सच मे वजन कम करना है तो उसके लिए भगीरथ प्रयत्नों की ही आवश्यकता होती है और वजन कम करने के बाद, उसे उतना ही बनाये (Maintain) रखने के लिए भी उतनी ही जद्दोजहद करनी पड़ती है। पर जिनको मोटापा ही जीभ ढीली होने की वजह से प्राप्त हुआ हो, उनसे ऐसे प्रयत्नों की अपेक्षा करना ही गलत होता है। इसलिये ऐसे लोगो के लिए आज एक नई संकल्पना आगे आई है - इंच लॉस। मतलब इसमे वजन कुछ खास कम नही होता। सिर्फ पेट, कूल्हों और जांघो के फैट को कुछ समय के लिए व्यायाम के सहारे थोड़ा कम किया जाता है, जिससे शरीर थोड़ा सुगठित और सुडौल दिखे। इसलिये ध्यान रहे कि अनावश्यक वजन न बढ़े क्योंकि एक बार वजन बढ़े तो उसके लिए निश्चितरूप से परिणाम देने वाली कोई औषधि नही है। अस्तु। शुभम भवतु।

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