Vaidya Somraj Kharche, M.D. Ph.D. (Ayu) 27 Jun 2019 Views : 820
Vaidya Somraj Kharche, M.D. Ph.D. (Ayu)
27 Jun 2019 Views : 820

शिफ्ट ड्यूटी वालों की दिनचर्या कैसी होनी चाहिए?

60 वर्ष उम्र वाले कुछ क्लिष्ट (क्लिष्ट अर्थात जिन्हें एक नही अपितु अनेक दुर्धर व्याधि एक साथ हो, Complicated) रुग्ण जब देखने मे आते है, तब लक्षण एवं व्याधि इतिहास लिखने के बाद उन्हें हम व्यवसाय पूछते है। तो देखने मे यह आता है कि व्यवसाय की वजह से इनमें से अधिकतम रुग्णों की दिनचर्या ही बिगड़ी हुई रहती है। जब मन मे आया तब खाएंगे और जब मन करे तब सोते है। पर कुछ लोगो के लिए ये लिए यह 'मन की बात' नही होती तो मजबूरी होती है। मजबूरी अर्थात जिसे वो चाहकर भी बदल नही सकते। क्योंकि वो जिस प्रतिष्ठान में नोकरी कर रहे होते है, वहां की समयसारणी भी वैसी ही होती है। व्यावसायिक समयसारणी की वजह से वो लोग चाहकर भी आयुर्वेद में लिखी हुई दिनचर्या का अनुसरण नही कर सकते। पर शरीर तो शरीर है, उसको यह ज्ञात नही होता की आप कहां काम करते हो और ऐसा करने की आपकी क्या मजबूरी है। शरीर को इन बातों से कोई लेना देना नही होता। उसे जो चाहिए वो चाहिए ही होता है। पर मनुष्य इस बात को समझता नही। इसलिये दिनचर्या पालन की इस गड़बड़ी में शरीर अपने हिसाब से यथास्थिती बनाये रखने की जीतोड़ कोशिश करता है परंतु उस व्यक्ति की विषम दिनचर्या ही शरीर मे नए नए व्याधि उत्पन्न करना शुरू कर देती है। आजकल ऐसे रुग्णों का प्रमाण बढ़ता जा रहा है। इसलिये यह आवश्यक है कि शिफ्ट ड्यूटी में काम करनेवाले सज्जनों के लिए एक आदर्शसम मतलब जो आदर्श तो नही हो सकती पर उसके जैसी एक दिनचर्या की समयसारणी बनानी पड़ेगी, जो व्याधि निर्माण की संभावनाओं को हो सके उतना कम कर दे।

शिफ्ट ड्यूटी 3 कालावधी में होती है। एक सुबह 8 से दोपहर 4 बजे तक, इसे फर्स्ट शिफ्ट कहते है। सेकंड शिफ्ट दोपहर 4 से रात 12 बजे तक होती है और थर्ड शिफ्ट रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक होती है। जिस कंपनी में माल का उत्पादन सतत चालू रखना पड़ता है, वहां इस प्रकार शिफ्ट ड्यूटी लगाई जाती है। जहां 24 घंटे मानव सेवा की आवश्यकता रहती है वहां भी इस तरह 3 शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है। फिर वो चाहे हॉस्पिटल हो या आर्मी। 

फर्स्ट शिफ्ट दिन में होती है इसलिये दिनचर्या में इससे कोई ज्यादा व्यवधान उत्पन्न नही होता। फिर भी दोपहर के भोजनकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मतलब मध्यानभोजन 12 बजे तक हो जाना चाहिए, इस बात का ध्यान रखना चाहिए। फिर 4 बजे कंपनी से निकलकर घर जाकर हाथ पैर धोकर (अनुकूलता के अनुसार स्नान भी किया जा सकता है) थोड़ा विश्राम अवश्य करना। उसके बाद अपना दैनिक क्रियाकलाप चालू रखे।

सेकंड शिफ्ट दोपहर 4 बजे से शुरू होती है और रात को 12 बजे तक चलती है। इस शिफ्ट में दोपहर का खाना 12 बजे तक ले लेना चाहिए। ड्यूटी 4 बजे की है इसलिये अपनी अनुकूलता के अनुसार घर से निकले। पर साथ मे शाम का खाना और थोड़ा नास्ता जरूर साथ मे ले। नाश्ते में उपमा, शिरा, पीठी शक्कर घी और रोटी, आलूपोहा, दूधपोहा, सादा अथवा बघार दिया हुआ ममरा, रवा अथवा आटे से बनाया हुए एकाध दो लड्डू, राजगिरे का लड्डू ऐसा कुछ नास्ते के लिए लेके जा सकते है। जिनको केला खाने से दिक्कत नही होती वो केले भी साथ मे लेके जा सकते है। ड्युटी पर जाने के बाद अगर भूख लगी तो साथ मे लाया हुआ थोड़ा नास्ता कर लेना चाहिए। यह नास्ता इतनी ही मात्रा में लेना चाहिए जिससे 7 बजे तक भूख लगे। बाद में जब 7 बजे के करीब भूख लगे तब खाना खा लेना चाहिए। वैसे शाम का खाना सूर्यास्त के पहले लेना हितकर होता है। पर यह व्यावसायिक मजबूरी की वजह से 7 बजे करना ठीक रहेगा। जब सेकंड शिफ्ट न हो, तब भी भोजन का यही समय रखे। भोजन के बाद कमसे कम 45 मिनिट तक विश्राम करना स्वास्थ्य के लिए अत्यावश्यक होता है। इसलिये खाने के बाद 45 मिनिट तक कोई अत्याधिक मेहनत का काम न करे। कंप्यूटर वर्क या अन्य कोई टेबल वर्क किया जा सकता है। अतःएव जिन श्रमिक बंधुओ को उनके मालिक खाने के तुरंत बाद काम करने के लिए बोलते है, उन्हें उनके मालिक से 45 मिनिट विश्रान्तिकाल देने की विनंती करनी चाहिए, अन्यथा आमवात (गठिया) जैसे जोड़ो के दर्द के व्याधि होने की प्रबल संभावना रहती है। भोजन के 45 मिनिट बाद कार्य आरंभ करे। फिर 11 बजे के करीब अगर भूख लगे तो दूध, चाय जैसा कोई पेय पीले। इसके बाद जब 12 बजे छुट्टी मिले, तो घर जाकर हाथ पैर धोकर सो जाएं। रात को 12.30 या 1 बजे घर आकर भूख लगे तो एकाध कप गर्म दूध पीकर सोंया जा सकता है। दूध उपलब्ध न हो तो सादा ममरा खाया जा सकता है पर भूल से भी कुछ ठोस पदार्थ खाना नही चाहिए। क्योंकि घर आने के बाद आप तुरंत सोनेवाले होते हो और खाने के तुरंत बाद सोनेवाले में गठिया रोग का प्रमाण बहुतायत रूप में पाया जाता है। फिर 12.30 या एक बजे सोकर सुबह 8 या 9 बजे उठे। मंजन, स्नान करके शुचिर्भूत हो जाये और चाय, दूध जो पीना है, वो पीये परन्तु संभव हो तब तक नाश्ता न करे। क्योंकि शुचिर्भूत होते होते 10 बज जायेंगे और 10 बजे नाश्ता करेंगे, तो 12 बजे भूख नही लगेगी और दोपहर में संभव हो तब तक 12 बजे के पहले ही भोजन कर लेना चाहिए। दोपहर 12 या उसके पहले भोजन करके अपने दैनिक क्रियाकलापों में व्यस्त हो जाये और फिर से 3 बजे की ड्यूटी के लिए निकल पड़े। यह समयसारणी सेकंड शिफ्ट वालो के लिए है।

थर्ड शिफ्ट रात को 12 बजे से सुबह 8 बजे तक होती है। यह शरीर बिगाड़ने वाली शिफ्ट है। जब अन्य कोई विकल्प ही आपके पास उपलब्ध नही, तभी इस शिफ्ट में काम करना चाहिए, अन्यथा थर्ड शिफ्ट यह सिर्फ शरीर मे रोग तैयार करने का एक जरिया मात्र है। सामान्यतः ऐसा कहा जाता है कि मनुष्य के शरीर का विकास (Development) रात को ही होता है। आधुनिक विज्ञान ने भी इस बात को सिद्ध किया है कि शरीर की वृद्धि करने के लिए कोशिकाओं के स्तर पर जो विभाजन होता है, वह रात को ही होता है। शरीर के डीएनए के स्तर पर भी अगर कोई नवीनीकरण (Maintenance) का काम करना है तो वो रात को आदमी सोने के बाद ही होता है। पर आदमी बिना सोये अगर जागता ही रहे तो नई कोशिकाएं तैयार होने की प्रक्रिया ही खंडित हो जाती है और डीएनए में भी अगर कोई समस्या आई, तो उसकी मरम्मत नही हो पाती। क्योंकि इन दोनों क्रियाओं के लिए आवश्यक हार्मोन रात को सोने बाद ही स्रवित होते है। रात को ड्यूटी करनेवालों के शरीर मे यह प्रक्रियाएं हो ही नही पाती। इसलिये अधिकतम देखा यह गया है कि सेकंड और थर्ड शिफ्ट में काम करनेवाले लोगो को कुछ काल के बाद दुर्धर व्याधि होते है, जो ठीक ही नही होते। इसलिये भारत सरकार को सेकंड और थर्ड शिफ्ट में मजबूरीवश काम करनेवाले श्रमिक बंधुओ को ज्यादा वेतनमान देने का कायदा करके लागू करना चाहिए।

रात को 12 बजे ड्यूटी शुरू होनी है, इसलिये घर से 11 या 11.30 बजे निकले। ठंडी बहोत हो तो ऊनी टोपी पहनकर निकले या मफलर बांधकर निकले। शाम का खाना 8 बजे ही हुआ होता है, इसलिये रात को 1 बजे के पहले भूख लगना संभव नही होता। परंतु रात को 2 से 3 के बीच भूख लग सकती है। ऐसी स्थिती में अगर आपका काम मेहनतवाला नही है तो सिर्फ दूध या चाय पीये और अगर मेहनतवाला काम है, तो सादा नाश्ता करे। सादा अर्थात जैसे सब्जी रोटी, दूध रोटी या पीठी शक्कर और रोटी या केले जैसे फल। रात में संकीर्ण (Complex) आहारपदार्थ जैसे आलू के चिप्स, पकोड़े, कचोरी, पफ, समोसा, इडली, डोसा, साम्भरवडा न खाए। वस्तुतः केले जैसे कफवर्धक फल रात को नही खाना चाहिए पर अगर काम मेहनतवाला है तो इससे कोई स्वास्थ्यहानी नही होती। बाकी नाईट शिफ्ट है और नींद आ रही है इसलिये बारबार चाय/कॉफी पीना अच्छा नही। ऐसी आदत पाचनतंत्र को अतिभयंकर रूप से खराब कर देती है। फिर सुबह 6 बजे फिर से एकबार चाय/दूध लिया जा सकता है। फिर 8 बजे ड्यूटी पूरी होने के बाद 8।30 या 9 बजे तक घर पर आए। आने के बाद नहाकर गरमागरम भोजन कर ले। भोजन 9।30 बजे तक हुआ हो और 1 बजे तक कुछ काम हो तो उनको निपटा दे और 1 बजे सो जाएं और सीधा रात को 8 बजे उठे। हाथ पैर धोकर फिर से गरमागरम भोजन कर ले और अपने क्रियाकलापों में व्यस्त हो जाइए।

एक और विकल्प भी इस दिनचर्या में है। जैसे रात को काम करने से ज्यादा थकावट महसूस हो रही हो, तो सुबह घर आने के बाद सिर्फ दूध पीकर (खाना खाकर सोने का निषेध है, इसलिये सिर्फ दूध ही पीये।) 9 बजे ही सो जाएं। 12 बजे उठकर नहा धोकर गरमागरम भोजन कर ले। अब इसके बाद 3 घंटे तक सो नही सकते इसलिये 12 से 3 के इस कार्यकाल में अन्य कामों का निपटारा किया जा सकता है। फिर 3 बजे के बाद फिर से 7-8 बजे तक सो जाएं। 7-8 बजे उठकर शुचिर्भूत होकर ताजा भोजन करे और अन्य कामों में व्यस्त हो जाइए। आयुर्वेद के अनुसार रात को जागकर अगर आपने कोई काम किया हो, तो दिन में उतने ही समय या कमसे कम उससे आधे समय तक कि नींद खाली पेट तो लेनी ही चाहिए। खाना खाकर भरे पेट सोना नही है यह ध्यान रखे।

सेकंड और थर्ड शिफ्ट वालो के लिए यह एक आदर्शसम (पूर्णतः आदर्श नही) समयसारणी है, जो सभी बंधुओं को अपनाकर अपना स्वास्थ्य बनाये रखने की कोशिश करनी चाहिए। सेकंड और थर्ड शिफ्ट वालो को संभव हो तो खाने में घर का बनाया हुआ घी प्रभूत मात्रा में लेना चाहिए। आर्थिक प्रतिकूलता की वजह से अगर यह संभव नही तो आयुर्वेदोक्त अभ्यंग (पूर्ण शरीर पर नारियल तेल जैसे तेल से मालिश करना), नस्य (नाक में घी या तिल तेल के बून्द डालना) तथा कर्णपुरण (कान में तेल डालना) जैसे उपक्रम घर पर ही करना चाहिए और आहार में केले, चिकू, सीताफल, आम जैसे मीठे फलों का अंतर्भाव करना चाहिए, जिससे रात को जागकर बढे हुए वातदोष को नियंत्रित रखा जा सके। पंचकर्म में संभव हो तो बस्ती कर्म जरूर करना चाहिए और आर्थिक प्रतिकूलता के चलते अगर बस्ती करना भी संभव नही तो उपरोल्लिखित अभ्यंगादि कर्मो को निश्चित रूप से करना चाहिए और जब आर्थिक संपन्नता आये तब नाईट शिफ्ट छोड़कर दिन में ही काम करना चाहिए अन्यथा जिनके लिए नोकरी छोड़ना संभव नही, उन्हें ऊपर बताई आदर्शसम दिनचर्या का जरूर अनुसरण करना चाहिए।

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