Vaidya Somraj Kharche, M.D. Ph.D. (Ayu) 06 Jun 2017 Views : 1153
Vaidya Somraj Kharche, M.D. Ph.D. (Ayu)
06 Jun 2017 Views : 1153

स्वामीआयुर्वेद काला मुनक्का सेन्द्रिय पद्धती (organic method) से विकसित (cultivate) किया जाता है, जिससे उसमे प्राकृतिक गुणोपलब्धि अपनी चरमसीमा पर रहती है। यह काला मुनक्का विविध व्याधियों में उपयोग किया जाता है। ऐसी ही कुछ व्याधी तथा अवस्थाओं का वर्णन आपकी सेवा में प्रस्तुत है।

1) काला मुनक्का यह मधुर, गुरु, स्निग्ध् और बृहण होने के कारण सभी वात-पित्त के विकारों में उपयोग किया जाता है, जैसे अम्लपित्त (hyperacidity ) शिर:शूल (Headache, migraine ), कास (खाँसी), आँखों मे जलन होना, मुँह सुखा सुखा रहना (Sjogren's syndrome), पेशाब में जलन होना (Burning micturition ) तीव्र ज्वर (high fever ), पीलिया (Jaundice ), आमाशय व्रण (stomach ulcer ) लू लगना (sunstroke ), चेचक (chiken pox) इन सब व्याधियों में एकल या अनुपान स्वरुप काले मुनक्के का यशस्वी प्रयोग किया जाता है।

2) उदावर्त: जिन्हें सदैव भयंकर कब्ज रहता है, उन्हें ही कुछ वर्ष पश्चात उदावर्त होता है। उदावर्त के रुग्णों को अत्यंत कठीण मल प्रवृत्ती होती है। रुग्ण एकबार शौचालय में गया की आधा पौन घण्टा बाहर ही नही आता। इस कठीण मलप्रवृत्ती की वजह से उदावर्त के रुग्णों में कई वर्षो बाद मानसिक रोग भी उत्पन्न होते देखे जाते है। ऐसे रुग्णों में कुछ भी चिकित्सा करो, सकारात्मक परिणाम नही मिलता। ऐसी परिस्थिती में अगर रोज बिना थके हारे कुछ महीनों तक काले मुनक्को का फांट अथवा काढा पिया जाये तो कितनी भी पुरानी कब्ज ही क्यू ना हो, धीमे धीमे कम होना शुरू हो जाती है। एतदर्थ रोज रात को 40 नग (piece) काले मुनक्के कुचलकर 300 मिली गरम पानी में भिगोकर सुबह मसल-छानकर यह पानी पीना चाहिए या फिर 4 कप पानी में 40 नग काले मुनक्के कुचलकर धीमी आँच पर 1 कप बचे तब तक उबालना चाहिये, फिर स्वच्छ कपडे से छानकर गरम गरम काढा पीना चाहिये। यह फांट / क्वाथ आंत्रदौर्बल्य को कम करता है। आंत्र की रुक्षता कम करता है। आंत्र में उत्पन्न व्रणों को (ulcerative colitis ) को भरने में मदद करता है।

3) स्वरभेद - स्वरभेद अर्थात गला/ आवाज बैठ जाना। बहुधा ऐसी विकृति में वात एवं कफदोष की वृद्धी ही कारणीभूत होती है। काले मुनक्के का उपरोल्लिखित फांट या क्वाथ ऐसी स्थिती में उत्तम कार्य करता है। सिर्फ काला मुनक्का चूसते रहने से भी स्वरभेद में फायदा होता है। स्वरतंतुओं के शोथ मे भी काला मुनक्का फायदा करता है, इसलिए जिन्हें रोज ज्यादा बोलना पड़ता है जैसे शिक्षक, राजनेता , गायक इन्हें नियमित रूप से काले मुनक्के का सेवन करना चाहिये।

4) मदात्यय - मदात्यय अर्थात अत्याधिक दारू पिने की वजह से उत्पन्न होनेवाला व्याधी समूह। मदात्यय इस व्याधी मे मानसिक स्तर के साथ साथ शारीरिक स्तर पर भी बहोत विकृतियाँ उत्पन्न होती है। अकेला काला मुनक्का तो इन विकृतियों को निश्चित रूप से ठीक नही कर सकता, इसके लिए तो रुग्ण को तज्ञ आयुर्वेद डॉक्टर की देखरेख में ही सम्पूर्ण चिकित्सा करवानी पडती है, फिर भी मदात्यय में ली जानेवाली सभी औषधियों का अनुपान काले मुनक्के का फांट / क्वाथ जरूर रखा जा सकता है, जिससे रुग्ण को निश्चितरूप से फायदा ही होता है। काला मुनक्का यकृत बल्य भी है और अग्निवर्धक भी है।

अन्य : खाना खाते खाते भी 30-40 नग मुनक्के प्रत्येक निवाले के साथ चबाकर खाये जा सकते है। जुनी और पुरानी कब्ज वालो को इससे फायदा ही होता है। कैंसर के जिन रुग्णों को रेडिएशन्स चालू है उन लोगो के लिए तो काले मुनक्के अमृतस्वरूप ही है। रेडिएशन की वजह से शरीर में उत्पन्न उष्णता एवं रुक्षता को अच्छी तरह से कम करता है तथा रुग्ण का दौर्बल्य कम करता है।


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